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राजकुमारी और राक्षस: सच्चे प्यार की जादुई कहानी - हिंदी

क्या एक डरावने राक्षस और सुंदर राजकुमारी में प्यार हो सकता है? पढ़िए 'राजकुमारी और राक्षस' की यह जादुई और भावुक कर देने वाली हिंदी कहानी। Moral Stories

By Lotpot
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बहुत पुरानी बात है, भारत के 'स्वर्णपुर' नाम के एक विशाल और समृद्ध राज्य में राजा वीरेंद्र सिंह का शासन था। राजा की तीन बेटियां थीं। तीनों ही दिखने में बेहद खूबसूरत थीं। सबसे बड़ी बेटी का नाम 'कामिनी', मँझली का नाम 'दामिनी' और सबसे छोटी का नाम 'नंदिनी' था।

कामिनी और दामिनी को महंगे गहनों और कपड़ों का बहुत शौक था, लेकिन सबसे छोटी राजकुमारी (Princess) नंदिनी का स्वभाव बिल्कुल अलग था। वह बहुत ही दयालु, समझदार और सादगी पसंद करने वाली लड़की थी। उसे प्रकृति और किताबों से बहुत प्यार था।

भयानक तूफान और रहस्यमयी महल

एक दिन, तीनों बहनें अपने सुरक्षा दल (Guards) के साथ राज्य की सीमा से लगे हुए 'मायावी जंगल' में घूमने निकलीं। मौसम बहुत सुहावना था, लेकिन अचानक आसमान में काले बादल छा गए। बहुत तेज़ आंधी और भयानक तूफान आ गया। धूल और तेज़ हवाओं के कारण राजकुमारियों का रथ भटक गया और उनके सैनिक इधर-उधर हो गए।

तूफान से बचने के लिए तीनों बहनें जंगल के घने हिस्से में भागने लगीं। कुछ दूर जाने पर उन्हें एक बहुत ही प्राचीन और रहस्यमयी महल दिखाई दिया। महल का दरवाज़ा खुला था। जब वे अंदर गईं, तो वहां कोई नहीं था, लेकिन डाइनिंग टेबल पर तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान रखे हुए थे और चिमनी में आग जल रही थी। तीनों बहनें बहुत थकी हुई और भूखी थीं। उन्होंने भरपेट भोजन किया और मखमली बिस्तरों पर सो गईं।

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नीला कमल और राक्षस का क्रोध

अगली सुबह जब नंदिनी की आँख खुली, तो वह महल के पीछे बने एक बेहद खूबसूरत बगीचे में टहलने चली गई। उस बगीचे में दुनिया के सबसे सुंदर फूल खिले थे। वहां एक जगह पर चमकता हुआ 'नीला जादुई कमल' खिला हुआ था। नंदिनी को वह फूल बहुत पसंद आया। उसने सोचा, "मैं यह फूल अपने पिताजी के लिए ले जाऊँगी।" यह सोचकर उसने जैसे ही वह नीला कमल तोड़ा, अचानक ज़मीन कांपने लगी!

एक ज़ोरदार गर्जना हुई और झाड़ियों के पीछे से एक बेहद विशाल और डरावना राक्षस (Monster) बाहर निकल आया। उसके शरीर पर बड़े-बड़े बाल थे और सिर पर सींग थे। राक्षस ने गुस्से में लाल आँखें करते हुए कहा, "तुम इंसान कितनी मतलबी हो! मैंने तुम्हें अपने महल में पनाह दी, सोने को बिस्तर दिया, और बदले में तुमने मेरा सबसे पसंदीदा जादुई फूल तोड़ लिया? अब मैं तुम तीनों बहनों को मार डालूँगा!"

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नंदिनी का बलिदान

राक्षस की आवाज़ सुनकर कामिनी और दामिनी भी वहां आ गईं और डर के मारे रोने लगीं। नंदिनी ने हिम्मत जुटाकर हाथ जोड़े और कहा, "मुझे क्षमा कर दीजिए। मुझे नहीं पता था कि यह फूल आपका है। मेरी बहनों की कोई गलती नहीं है, कृपया उन्हें जाने दें। फूल मैंने तोड़ा है, इसलिए आप जो चाहें मुझे सज़ा दे सकते हैं।"

राक्षस को नंदिनी की इस बात पर आश्चर्य हुआ। उसने एक शर्त रखी, "ठीक है, मैं तुम्हारी बहनों को सुरक्षित घर जाने दूँगा। लेकिन इसके बदले में तुम्हें हमेशा के लिए यहाँ मेरी कैदी बनकर रहना होगा।" नंदिनी ने अपनी बहनों की जान बचाने के लिए यह शर्त मान ली। यह प्रेरणादायक कहानी यहीं से एक नया मोड़ लेती है।

कैद से दोस्ती तक का सफर

शुरुआत में नंदिनी बहुत डरी हुई और उदास रहती थी। लेकिन धीरे-धीरे उसने देखा कि वह राक्षस बाहर से जितना खूंखार दिखता था, अंदर से उसका दिल उतना ही कोमल था। वह नंदिनी का बहुत ख्याल रखता था। उसने नंदिनी को पढ़ने के लिए एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी दी और कभी उस पर चिल्लाया नहीं।

राजकुमारी और राक्षस के बीच बहुत अच्छी दोस्ती हो गई। वे दोनों घंटों तक बगीचे में बातें करते। एक दिन राक्षस ने नंदिनी से पूछा, "नंदिनी, क्या तुम मुझसे शादी करोगी?" नंदिनी राक्षस को पसंद तो करती थी, लेकिन उसके डरावने रूप के कारण वह हाँ नहीं कह पाई। उसने चुप रहना ही बेहतर समझा। राक्षस ने भी कभी उस पर कोई दबाव नहीं डाला।

जादुई आईना और घर की याद

एक दिन राक्षस ने नंदिनी को एक जादुई आईना (Magic Mirror) दिया, जिसमें वह दुनिया की कोई भी चीज़ देख सकती थी। नंदिनी ने उसमें अपने पिता को देखा। उसके पिता नंदिनी के गम में बहुत बीमार पड़ गए थे। नंदिनी फूट-फूटकर रोने लगी।

राक्षस को उसका दुख नहीं देखा गया। उसने कहा, "तुम अपने पिता से मिलने जा सकती हो, लेकिन तुम्हें सात दिन के अंदर वापस लौटना होगा। अगर तुम नहीं आईं, तो मैं दुख से मर जाऊँगा।" नंदिनी ने वादा किया और जादुई अंगूठी की मदद से तुरंत अपने महल पहुँच गई। नंदिनी को वापस पाकर राजा बहुत खुश हुए और उनकी तबीयत जल्दी ही ठीक हो गई। अपने परिवार के साथ रहकर नंदिनी समय का ध्यान ही भूल गई।

एक डरावना सपना और सच्चाई

आठवां दिन लग चुका था। उस रात नंदिनी ने एक सपना देखा। उसने देखा कि महल के बगीचे में वह राक्षस उसी नीले कमल के पास बेसुध पड़ा है और दर्द से कराह रहा है। नंदिनी घबराकर उठ गई। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने तुरंत जादुई अंगूठी घुमाई और राक्षस के महल में पहुँच गई।

वह भागती हुई बगीचे में गई। वहां राक्षस सचमुच ज़मीन पर पड़ा था और उसकी सांसें उखड़ रही थीं। नंदिनी रोते हुए उसके पास गई। उसने राक्षस का बड़ा सा सिर अपनी गोद में रख लिया। "उठो! कृपया अपनी आँखें खोलो! मुझे माफ़ कर दो, मुझे आने में देर हो गई," नंदिनी रोने लगी। "मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और मैं तुमसे ही शादी करूँगी!"

श्राप का अंत और खुशियां

जैसे ही नंदिनी के आँसू राक्षस के चेहरे पर गिरे और उसने 'प्यार' का इज़हार किया, अचानक एक तेज़ जादुई सुनहरी रोशनी पूरे बगीचे में फैल गई। नंदिनी ने अपनी आँखें बंद कर लीं। जब उसने आँखें खोलीं, तो वहां कोई भयानक राक्षस नहीं था, बल्कि एक बेहद सुंदर और आकर्षक राजकुमार लेटा हुआ था।

राजकुमार ने मुस्कुराते हुए कहा, "नंदिनी! मेरा नाम राजकुमार सिद्धार्थ है। एक दुष्ट जादूगरनी ने मुझे मेरे घमंड के कारण राक्षस बना दिया था। उसने श्राप दिया था कि जब तक कोई लड़की मेरे इस डरावने रूप से सच्चा प्यार नहीं करेगी, तब तक मैं इस श्राप से मुक्त नहीं हो पाऊँगा। तुम्हारे सच्चे प्यार ने मेरा श्राप तोड़ दिया है। मैं इसी दिन का इंतज़ार कर रहा था।"

यह देखकर नंदिनी की खुशी का ठिकाना न रहा। इसके बाद, राजकुमार सिद्धार्थ नंदिनी के साथ उसके राज्य गया। राजा वीरेंद्र सिंह ने बहुत ही धूमधाम से दोनों की शादी कर दी। और फिर राजकुमारी और राक्षस (जो अब राजकुमार बन चुका था) हमेशा के लिए खुशी-खुशी रहने लगे।

बच्चों, लोटपोट की ये जादुई कहानियां हमें हमेशा एक बहुत ही खूबसूरत संदेश देती हैं।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story):

  1. सच्ची सुंदरता अंदर होती है: किसी भी इंसान को उसके बाहरी रूप या शक्ल-सूरत से नहीं आंकना चाहिए। असली सुंदरता इंसान के दिल और उसके व्यवहार में होती है।

  2. वादे का पक्का होना: हमें हमेशा अपने किए गए वादे पूरे करने चाहिए, वरना किसी को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

  3. दयालुता: अच्छे और दयालु स्वभाव से बड़े से बड़े श्राप और दुश्मनी को प्यार में बदला जा सकता है।

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